बेरोजगारी की समस्या पर निबंध - देश की प्रगति के लिए व्यक्ति के पास कुशल रोजगार होना बहुत महत्वपूर्ण होता है देेश को तेजी से विकास की ओर ले जाने के लिए शिक्षा और रोजगार कितना महत्वपूर्ण है यह सभी जानते हैं, आइए इसे "बेरोजगारी पर निबंध इन हिंदी" के माध्यम से जानें। 

बेरोजगारी की समस्या पर निबंध | Berojgari Ki Samasya Par Nibandh in Hindi


बेरोजगारी की समस्या पर निबंध
Berojgari Ki Samasya Par Nibandh

प्रस्तावना

समाज में रहने वाले युवाओं के लिए बेरोजगारी एक अभिशाप है क्योंकि देश का भविष्य उन्हीं के हाथों में होता है, आजकल अक्सर देखने को मिलता है कि पढ़ाई लिखाई करने के बावजूद भी उन्हें कोई काम नहीं मिलता जो एक बहुत बड़ी समस्या है इसके कई कारण हो सकते हैं जिनमें एक बढ़ती जनसंख्या भी है जिसकी वजह से सभी व्यक्तियों को कार्य उपलब्ध करना मुश्किल हो जाता है और बेरोजगारी समस्या आ जाती है।

बेरोजगारी से क्या आशय है | बेरोजगारी क्या है?


बेरोजगारी का आशय (अर्थ) है - जब कोई व्यक्ति काम करने में इच्छुक होता है या कार्य करना चाहता है किन्तु कार्य के अभाव या कोई अवसर प्राप्त ना होने की वजह से उसे उचित कार्य नहीं मिलता और इसलिए वह व्यक्ति बेरोजगार हो जाता है, व्यक्ति की इस स्थिति को बेरोजगारी (Unemployment) कहते हैं तथा देेश व समाज में बढ़ती इस समस्या को बेरोजगारी की समस्या कहा जाता है।

ग्रामीण बेरोजगारी क्या है?


ग्रामीण बेरोजगारी का अर्थ है - गांव में रहने वाले युवा पीढ़ी के लिए रोजगार की कमी।
भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां ग्रामीणों द्वारा हर साल फसल उगाई और उचित मूल्य पर बेची जाती है इससे उन्हें मुनाफा कमाने को मिलता है किन्तु कुछ फसल ऐसे होते हैं जिन्हें उचित मौसम (सीजन) आने पर बुना जाता है इसलिए साल के 365 दिन ग्रामीणों के पास रोजगार नहीं होता उस वक्त उन्हें काम की जरूरत होती है पर किसी कारण से उनके लायक कोई काम नहीं मिलता, इसे "ग्रामीण बेरोजगारी" कहेंगे।

बेरोजगारी के प्रकार - Types of Unemployment in Hindi

व्यक्ति कई अलग-अलग वजहों से बेरोजगार हो सकता है और इसके अनुसार बेरोजगारी के प्रकार भी बहुत से होंगे जिनमें कुछ हमें आस पड़ोस में देखने को मिलते हैं। बेरोजगारी के प्रकार निम्न हैं -

1. मौसमी बेरोजगारी :- इस प्रकार की बेरोजगारी जिसमें साल के कुछ महीने ही काम मिलता है उसके बाद व्यक्ति बेरोजगार हो जाता है।

2. शिक्षित बेरोजगारी :- व्यक्ति बचपन में पढ़ लिख कर कुछ बनने या नौकरी प्राप्त करने का ख्वाब देखता है लेकिन शिक्षित होने के बावजूद भी जब उसे नौकरी नहीं मिलता तो इस प्रकार की बेरोजगारी को शिक्षित बेरोजगारी (educated unemployment) कहा जाता है।

3. स्वैच्छिक बेरोजगारी :- जो व्यक्ति भविष्य में बेहतर कार्य की तलाश में है और उसे आए दिन कई प्रकार के काम प्राप्त हो रहे हैं लेकिन उसे वह स्वयं अपनी इच्छा से नहीं करना चाहता तो इसे स्वैच्छिक बेरोजगारी कहेंगे।

बेरोजगारी के मुख्य कारण (Reasons for unemployment)


कई कारण हो सकते हैं आजकल बेरोजगारी के, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्न हैं - 

1. देश में बढ़ती हुई जनसंख्या


बेरोजगारी बढ़ने का एक बड़ा कारण जनसंख्या वृद्धि है क्योंकि बड़ी आबादी वाली देश में हर किसी को नौकरी या व्यापार उपलब्ध कराना बहुत मुश्किल होता है यही कारण है कि अधिक जनसंख्या वाले देश में बेरोजगारी की समस्या देखने को मिलती है।

2. लोगों का अशिक्षित होना


आज भारत में बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्कूल लगती है जहां अधिकतर बच्चे पढ़ने जाते हैं लेकिन हमारे देश में ऐसे युवक भी हैं जो भी किशोरावस्था में हैं और उन्होंने अपने समय में पढ़ाई नहीं करी है मतलब अशिक्षित हैं तो यह भी एक बड़ा कारण है बेरोजगारी की समस्या बढ़ने का।

3. सीमित सोच


सीमित सोच रखने वाले व्यक्ति भी अक्सर बेरोजगार हो जाते हैं क्योंकि जब तक सोच सीमित रहेगी, जब तक जीवन में कुछ अलग या नया करने की नहीं सोचेंगे, तब तक वे नई चीजों के बारे में नहीं जान सकते।

4. नौकरी पर पूरी तरह निर्भर होना


यह भी बेरोजगारी का कारण है क्योंकि कई लोग केवल नौकरी पर निर्भर रहते हैं और उसी के लिए सालों कड़ी मेहनत करते हैं किंतु सरकारी नौकरी में सीमित पद के वजह से बहुत कम लोगों को नौकरी लग जाती है और बाकी बचे लोग बेरोजगार हो जाते हैं।

5. आत्मनिर्भरता की कमी


रोजगार पाने या अन्य कार्य करने हेतु स्वयं को आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक होता है नहीं तो खुद अपने जीवन के आवश्यक फैसले लेना मुश्किल हो जाता है। आत्म-निर्भर नहीं होने पर व्यक्ति किसी दूसरे पर निर्भर रहता है कार्य पाने के लिए, ऐसे में संभावना कम होती है कि उसे काम मिले, यदि मिले तो ठीक, नहीं तो व्यक्ति बेरोजगार हो जाता है।

6. सालभर कार्य ना मिलना


साल में 365 दिन होते हैं लेकिन जरूरी नहीं है कि पूरे साल किसी व्यक्ति को कार्य या रोजगार मिले तो यह भी एक कारण होता है बेरोजगारी का। देश के किसानों को भी यह समस्या आती है क्योंकि वे फसल के सीजन पर ही खेती कर सकते हैं और जब खेती का सीजन खत्म हो जाता है उसके बाद उनके पास कोई अच्छा माध्यम नहीं होता है काम के लिए जिससे कमाई हो।

बेरोजगारी की समस्या का समाधान (Solution to the problem of unemployment) 


1. उचित शिक्षा 


शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है छोटे बच्चे और युवाओं को उचित शिक्षा देनी चाहिए उनके कार्यक्षेत्र के हिसाब से, ताकि वह अपना काम सफलतापूर्वक कर सकें।

2. जनसंख्या नियंत्रण करना होगा


तेजी से बढ़ रही जनसंख्या वृद्धि को रोकना होगा नहीं तो भविष्य में हर एक व्यक्ति को किसी पद के लिए नौकरी प्रदान करना इतना आसान नहीं होगा। जनसंख्या वृद्धि सबसे बड़ा कारण है बेरोजगारी की समस्या का इसलिए इसका निवारण अनिवार्य है।

3. रोजगार के अवसर प्रदान करना


हमारे देश में कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें एक निश्चित समय पर किया जाता है उसके बाद व्यवसाय के लिए अन्य विकल्प नहीं होता तो ऐसी स्थिति में उन्हें नई रोजगार के अवसर प्राप्त होने चाहिए।

4. मजदूरों को कार्य सौंपना 


टेक्नोलॉजी बढ़ने की वजह से सभी बड़े तथा मुश्किल काम मशीनों द्वारा पूर्ण किया जाता है, ये जरूरी भी है कार्य में शीघ्रता लाने के लिए किन्तु छोटे (आसान) कार्य जिसे आम आदमी द्वारा किया जा सकता है उन्हें श्रमिकों को करने देना चाहिए इससे उन्हें रोजगार मिल जाएगा।

5. घरेलू उद्योग

घरेलू उद्योग बिजनेस को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है इससे व्यक्ति कम पूंजी में व्यवसाय शुरू कर सकता है, इस प्रकार के उद्योग बेरोजगारी कम करने में सहायक साबित होते हैं।

बेरोजगारी के दुष्परिणाम या नुकसान

  • बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है इसलिए इसके दुष्परिणाम भी देखने को मिलते हैं यदि ज्यादातर व्यक्ति के पास रोजगार ना हो और बेरोजगारी की समस्या हर घर में हो जाए तो देश के प्रगति में बड़ी बाधा आ जाएगी।
  • बेरोजगारी से एक बड़ा नुकसान यह भी है कि व्यक्ति को जीवन यापन करने में बहुत कठिनाई होती है, उसके आवश्यक चीजें, घरों के सामान खरीदने और खुशहाल जीवन व्यतीत करने में मुश्किलें देखने को मिलते हैं।
  • बेरोजगारी की समस्या केवल कमाई करके जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं है बल्कि इससे घरों में भी लड़ाई झगड़े जैसे समस्याएं देखने को मिलते हैं, बढ़ती तंगी की वजह से परिवारों में बहस हो जाती है।
  • काम धंधे की कमी के कारण जब व्यक्ति बेरोजगार हो जाता है तो वह कमाई के लिए गलत रास्ते अपना लेता है।
  • व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है क्योंकि उसके ऊपर कई बड़ी जिम्मेदारियां आ जाती है जिसे वह बिना किसी रोजगार के पूरी नहीं कर सकता।
  • इसका नुकसान नई पीढ़ी में भी देखने को मिलता है जब किसी परिवार में बेरोजगारी की समस्या आ जाती है तो उस घर के छोटे बच्चों को भी उचित शिक्षा नहीं मिल पाती, उनके एडमिशन, पेन, नोटबुक आदि लेने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते, इसी वजह से कई बच्चे बड़े महाविद्यालय में नहीं पढ़ पाते उसके बाद उन्हें भी कार्य के लिए भटकना पड़ता है।

निष्कर्ष

Berojgari ki samasya खत्म करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक है क्योंकि भविष्य में इससे और अधिक बेरोजगारी फैल सकते हैं, सरकार को इस विषय पर विचार करने की आवश्यकता है साथ ही बेरोजगारी का हल निकालना होगा।

इस तरह से बेरोजगारी की समस्या पर निबंध इन हिंदी लेख समाप्त होता है, उम्मीद करता हूं आपको इस लेख के माध्यम से बेरोजगारी के बारे में कुछ जानने को मिला हो यदि आपको इस लेख से संबंधित कोई सुझाव देना हो तो कृपया कमेंट करें, आप इस पोस्ट से संबंधित किसी भी सवाल को comment के माध्यम से पूछ सकते हैं मैं उसका जवाब देने की पूरी कोशिश करूंगा।

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